टीकमगढ़, 25 जून 2026।आगामी सिंहस्थ-2028 महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुव्यवस्थित आवागमन तथा निर्बाध धार्मिक आयोजन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टीकमगढ़ पुलिस द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक आपदा प्रबंधन, संवेदनशील पुलिसिंग तथा बड़े धार्मिक आयोजनों की चुनौतियों का प्रभावी एवं मानवीय ढंग से सामना करने के लिए तैयार करना है।
इसी क्रम में पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित चतुर्थ बैच के प्रशिक्षण सत्र में पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर सिंह मंडलोई ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को “श्रद्धालु सुरक्षा, संवेदनशील पुलिसिंग एवं मानवीय आपदा प्रबंधन” विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।
अपने संबोधन में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सिंहस्थ केवल एक विशाल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक भावनाओं का महापर्व है। ऐसे अवसर पर प्रत्येक पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा का भरोसा, सहायता का केंद्र और विश्वास का प्रतीक भी होता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय क्षमता के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होती है। पुलिस का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे हर श्रद्धालु स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सहयोग प्राप्त करने योग्य महसूस करे।
प्रशिक्षण के दौरान संभावित भगदड़ की रोकथाम, भीड़ के वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध प्रबंधन, आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी (Evacuation), आपातकालीन राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय, यातायात प्रबंधन, घाटों एवं प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था, महिला एवं बाल सुरक्षा, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहायता, लापता व्यक्तियों की खोज, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के प्रभावी उपयोग, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों की रोकथाम तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वित कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
👉 पुलिस अधीक्षक श्री मंडलोई ने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता संसाधनों से अधिक पुलिस बल की सतर्कता, अनुशासन, समयबद्ध निर्णय क्षमता तथा टीम भावना पर निर्भर करती है। प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को परिस्थितियों का पूर्व आकलन कर सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए, जिससे किसी भी चुनौती का समय रहते प्रभावी समाधान किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सिंहस्थ जैसे आयोजनों में जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण सत्र के समापन पर पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा—
“सिंहस्थ महापर्व हमारी पेशेवर दक्षता, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण की वास्तविक परीक्षा है। हमारा लक्ष्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को ऐसा सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है, जहाँ वह पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ अपनी धार्मिक यात्रा संपन्न कर सके।”
टीकमगढ़ पुलिस सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के अंतर्गत सतत प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, तकनीकी दक्षता एवं बेहतर समन्वय के माध्यम से ऐसी सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे महापर्व के दौरान सुरक्षा, सेवा और सुव्यवस्था का सर्वोच्च स्तर सुनिश्चित किया जा सके।
टीकमगढ़ पुलिस
“सुरक्षा • संवेदनशीलता • सेवा”





